“शिक्षा का तात्पर्य उस प्रक्रिया से है, जिसमें बालक या व्यक्ति के सर्वांगीण विकास को दृष्टि में रखते हुए उनमें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक एवं धार्मिक संस्कारों का विकास किया जाता है।” – पं. मदन मोहन मालवीय